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Monday, November 16, 2009

लड़ते रहना........


इंसान को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और उसी रवैये को प्रस्तुत करता हुआ ये शेर........... 

 लड़ते रहना इन अंधेरों से,
एक दिन सूरज तेरा ग़ुलाम बन जाएगा.
ग़म न कर काले बादलों का,
खुद आसमाँ तेरे लिए इन्हें हटायेगा.
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क्या हुआ अगर आनेवाले इम्तिहान और भी है,
क्या हुआ अगर सामने तूफ़ान और भी है.
अभी तो आसमाँ के आगे आसमाँ और भी है,
तारों से आगे जीतने के लिए एक जहाँ और भी है.
तू फ़िक्र न कर ग़मों की ऐ दोस्त,
अभी राहों में आनेवाले खुशियों के मकाम और भी है.


हिम्मत न हार....................
                                            
_____   देव 

Friday, October 30, 2009

........वक्त नहीं


........वक्त नहीं

हर खुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हँसी के लिए वक्त नहीं।
दौड़ती हुई इस दुनियाँ में,
आजकल ज़िन्दगी के लिए ही वक्त नहीं।

माँ की लोरी का एहसास तो है,
पर माँ को माँ कहने का वक्त नहीं।
सारे जाने-पहचाने नाम मोबाइल में है,
पर किसीसे दोस्ती के लिए वक्त नहीं

गैरों की अब क्या बात करें हम,
जब अपनों को अपनो के लिए ही वक्त नहीं।
पराये एहसानों की क्या कदर करें,
जब अपने सपनों के लिए ही वक्त नहीं।

आंखों में है नींद भरी,
पर यहाँ सोने का भी वक्त नहीं।
दिल है ग़मों से भरा हुआ,
पर अब तो रोने का भी वक्त नहीं।


तू
ही बता ज़िन्दगी,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा
के, हरपल मरनेवालों को,
जीने के लिए भी वक्त नहीं

Wednesday, October 28, 2009

दर्दभरा फ़साना


एक परिंदे का दर्दभरा फ़साना था,
टूटे हुए पंख और उड़ते हूए जाना था।
तूफान तो वो झेल गया पर हुआ एक अफ़सोस,
वही डाल टूटी जिसपे उसका आशियाना था।

Monday, September 7, 2009

किसीने समझा ही नहीं

मैं कहना चाहता हूँ क्या,
ये किसीने समझा ही नहीं
इस दिवाने दिल का अरमान हैं क्या ,
ये किसीने समझा ही नहीं
मेरी हँसी के साथ-साथ,
वो भी हँस दिए ज़ोर से
किन हालातों में हँसता हूँ मैं,
ये किसीने समझा ही नहीं
____ देव